Home Loan: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने सालाना निरीक्षण के दौरान पाया कि कई बैंक और वित्तीय संस्थाएं ग्राहकों से ब्याज वसूलने में अनुचित तरीके अपना रहे थे। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने कड़े कदम उठाते हुए नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे होम लोन लेने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, इस फैसले से बैंकों को कई सौ करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा है।
क्या है आरबीआई का नया निर्देश?
आरबीआई के नए निर्देश के अनुसार, सभी बैंक और वित्तीय संस्थाओं को अब ग्राहक को धनराशि के वास्तविक वितरण की तिथि से ही ब्याज वसूलना होगा। जांच के दौरान यह पाया गया कि कई बैंक लोन मंजूर होने की तारीख से ही ब्याज वसूलना शुरू कर देते थे, जबकि वास्तव में पैसा ग्राहक को कई दिन या हफ्तों बाद मिलता था। इससे ग्राहकों को अनावश्यक रूप से अधिक ब्याज चुकाना पड़ता था।
चेक के माध्यम से लोन वितरण में गड़बड़ी
आरबीआई के निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कई मामलों में बैंक ऋणकर्ताओं को चेक के माध्यम से लोन वितरित करते थे, लेकिन ब्याज चेक जारी करने की तारीख से वसूलना शुरू कर देते थे। वास्तव में, ग्राहक को चेक कई दिनों बाद मिलता था और उसे भुनाने में भी समय लगता था। इस कारण ग्राहकों को ऐसे समय का भी ब्याज चुकाना पड़ता था, जब उनके पास पैसा नहीं था।
ऑनलाइन ट्रांसफर का निर्देश
इस समस्या को हल करने के लिए, आरबीआई ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को चेक जारी करने के बजाय ऑनलाइन खाता हस्तांतरण के माध्यम से लोन वितरित करने का निर्देश दिया है। इससे पैसे के हस्तांतरण की तारीख स्पष्ट होगी और ग्राहकों को वास्तविक समय से ही ब्याज देना होगा।
प्रमुख बैंकों के प्रोसेसिंग शुल्क
विभिन्न बैंकों द्वारा होम लोन पर लिए जाने वाले प्रोसेसिंग शुल्क में भी अंतर है। यहां प्रमुख बैंकों के प्रोसेसिंग शुल्क की जानकारी दी गई है:
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अपने ग्राहकों से प्रोसेसिंग फीस के रूप में लोन राशि का 0.35% प्लस लागू जीएसटी वसूलता है। यह न्यूनतम 2,000 रुपये प्लस जीएसटी और अधिकतम 10,000 रुपये प्लस लागू जीएसटी है।
1.एचडीएफसी बैंक लोन राशि पर अधिकतम 1% और न्यूनतम 7,500 रुपये प्रोसेसिंग फीस वसूलता है।
2.आईसीआईसीआई बैंक ऋण राशि का 0.50% से 2.00% या 3,000 रुपये, जो भी अधिक हो, प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में लेता है।
3.पंजाब नेशनल बैंक अपने ग्राहकों से लोन राशि पर 1% प्लस जीएसटी का प्रोसेसिंग चार्ज वसूलता है।
ग्राहकों को होने वाले फायदे
आरबीआई की इस नई गाइडलाइन से ग्राहकों को कई फायदे होंगे। सबसे पहले, उन्हें अब वास्तविक धनराशि प्राप्त करने की तारीख से ही ब्याज देना होगा, जिससे अनावश्यक ब्याज भुगतान से बचा जा सकेगा। दूसरा, ऑनलाइन हस्तांतरण से लोन प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। तीसरा, चेक के माध्यम से होने वाली देरी और अतिरिक्त ब्याज के बोझ से ग्राहक मुक्त होंगे।
बैंकों पर प्रभाव
हालांकि इस नई गाइडलाइन से ग्राहकों को राहत मिली है, लेकिन बैंकों को कई सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। पहले बैंक लोन मंजूरी और वास्तविक वितरण के बीच के अंतराल के दौरान भी ब्याज वसूल लेते थे, जो अब संभव नहीं होगा। इसके अलावा, वे जिन मामलों में पहले गलत तरीके से ब्याज वसूला था, उन्हें वापस करना पड़ सकता है।
आरबीआई का सख्त रुख
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इन नए निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा। अगर कोई बैंक या वित्तीय संस्था इनका उल्लंघन करता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी।
उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
होम लोन लेने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें और समझें। ब्याज शुरू होने की तारीख, प्रोसेसिंग फीस और अन्य खर्चों के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करें। अगर कोई संदेह हो, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। साथ ही, अपने लोन खाते की नियमित जांच करें और किसी भी अनियमितता की शिकायत आरबीआई या बैंकिंग लोकपाल से करें।
आरबीआई की इस पहल से वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों के हितों की रक्षा होगी। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में जनता का विश्वास बढ़ाने में भी मदद करेगा। ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी अनुचित प्रथा का विरोध करना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने बैंक या वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी नुकसान या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे, जो इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए निर्णयों के कारण हो सकती है।